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Showing posts from February, 2026

वन्दे मातरम् - मूल पाठ, सरल अर्थ और इस्लामी दृष्टि से विवेचन

*भूमिका*   मुसलमान अपने धर्म में तीन बातों का विशेष ध्यान रखते हैं:   *1. आस्था (विश्वास)* *2. बोली (भाषा)* *3. कर्म (व्यवहार)*   इन तीनों में वे पूरी कोशिश करते हैं कि कहीं भी अल्लाह के साथ किसी को साझी न ठहराया जाए। *आस्था (विश्वास)* मुसलमान उसी पर विश्वास रखते हैं जो क़ुरआन और सही हदीस से सिद्ध हो, और जो इसके विरुद्ध हो उसे स्वीकार नहीं करते। किसी विद्वान या व्यक्ति की बात तब तक नहीं मानते, जब तक वह इन शिक्षाओं के अनुरूप न हो। *बोली (भाषा)* वे अपनी भाषा में ऐसे शब्द नहीं बोलते जिनसे पूजा, बंदगी या ईश्वर जैसी भावना अल्लाह के अलावा किसी और के लिए प्रकट हो। *कर्म (व्यवहार)*   वे अपने व्यवहार में भी सावधानी रखते हैं कि कोई कार्य अल्लाह के अलावा किसी और की पूजा जैसा न बन जाए। *तोहिद और शिर्क का अर्थ* *तोहिद* तोहिद का अर्थ है: केवल एक ईश्वर की पूजा करना उसी को सृष्टि का रचयिता मानना पूजा उसी तरीके से करना जैसा बताया गया है! इस्लाम में कोई भी उपासना तभी स्वीकार होती है, जब उसमें दो ज़रूरी शर्तें हों: *पहली शर्त:* उपासना केवल ईश...